Popads

Saturday, 29 October 2016

Happy Diwali Greetings .............. from Specialist Doctors............Enjoy Ha ha Ha


" ....Happy Diwali greetings . ...

Speciality wise. ...."...

Paediatrician :

" We wish you a happiness in this festival season equal to that of a Paediatrician when he observes. ...
First cry. ...
First urination. ..
First meconium passing. .."
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Obstetrician :

" We wish you a very prosperous Diwali equal to the prospering of a pregnant abdomen from 0 to full term. ....".......
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Surgeon :

" We wish you a Diwali with relief  from all the worries ,  equal to that of relief of first flatus post operatively. ..."....
....Let your happiness be as high as when a pretty lady surgeon is examining your hernia / hydrocele. ...."
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Physician :

" In this festival, let your happiness be.....
....as high as a sugar level of an uncontrolled diabetic. ..
....Let your worries be as low as a urine output of an anuric patient. ..
...Let your prosperity bounce similar to the bouncing of heart rate from normal to SVT. ...."....
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Orthopedician : 

" Let your happiness in this Diwali persist like a chronic, idiopathic  back pain....."
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Anaesthesiologist : 

" We wish you a very peaceful festival equal to that of a person in deep anesthesia  ....."....
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Ophthalmologist :

" In this festival,  let your problems be as dim as a vision of a bilaterally fully mature cataract patient. ..."
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Pathologist : 

" From this festival onwards, let your signature earn for you. ..."
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धनतेरस पर धन को महत्त्व देना कहाँ तक उचित है?

धनतेरस पर धन को महत्त्व देना कहाँ तक उचित है?
प्रश्न:
धनतेरस में "धन" शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर:
यह बहुत कम लोग जानते है की वास्तव में धनतेरस में "धन" शब्द स्वास्थ्य के देवता धनवंतरी से लिया गया है
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न:
अगर धन नहीं तो फिर धनतेरस का क्या महत्त्व है?

उत्तर:
देवी लक्ष्मी हालांकि की धन देवी हैं परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वस्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है दीपावली दो दिन पहले से ही यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें।

प्रश्न:
आज के दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा क्यों है?

उत्तर:
समुद्र मंथन के समय धन्वन्तरि जी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे इसी कारण इस दिन बर्तन खरीदने की प्रथा है
आज के दिन वास्तविक परम्परा केवल नया बर्तन खरीदने की है या चाँदी भी खरीद सकते है
बाजारीकरण और धन के प्रति हमारे लगाव ने हमें अँधा बना दिया है और हम भीड़ के पीछे चलकर कुछ भी खरीदने को चल पड़ते है जैसे टीवी, गाडी, कपडे, फर्नीचर आदि जो मूर्खता है और पूर्णतया कुंठित उपभोक्तावाद से प्रेरित है

प्रश्न:
इस दिन चाँदी खरीदने की प्रथा क्यों है?

उत्तर:
इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है।
संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।
भगवान धन्वन्तरी जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है।
लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हें।
हम स्वास्थ्य रुपी धन के इस दिन को केवल पैसे की दृष्टि से न देखें /

~आप सभी को धन तैरस की बहुत बहुत शुभकामनायें बधाइयाँ।