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Sunday, 15 November 2015

बिहार के हालात पर कवि गौरव चौहान जी की लिखी हुई ये रचना

बिहार के हालात पर कवि गौरव चौहान जी की लिखी हुई ये शानदार रचना आप सब को अवश्य पसन्द आएगी।



 


विजय के शोर में डूबे बिहारी बाबुओं सुन लो,
अदालत से सजा पाये,पुराने डाकुओं सुन लो,



कबूतर खुद शिकारी को ख़ुशी से जान दे बैठे,
गनीमत है बिहारी लोग जीवनदान दे बैठे,



तुम्हारे सब कुकर्मो पर चलो पर्दा गिराया है,
कुपोषित भैंस पर चढ़कर सुशासन लौट आया है,



पराजित हो गया विक्रम,चलो बेताल भी खुश हैं,
मगन हैं खान आज़म,सोनिया के लाल भी खुश हैं,,



पुरस्कारी बवालों के सभी किरदार भी खुश हैं,
कई चैनल,कई दफ्तर,कई अखबार भी खुश हैं,



हमें भी है ख़ुशी,यह लोकशाही की निशानी है,
नयी दारू भले ही है,भले बोतल पुरानी है,



मगर उस पार दुश्मन क्यों घरो में जश्न करता है?
भुजाएं खोलकर चौहान तुमसे प्रश्न करता है,



बिहारी जीत पर आतंक का सामान क्यों खुश है?
हमें कोई बताये आज पाकिस्तान क्यों खुश है?



बड़ा ही साफ़ मतलब है,बड़ी फितरत पुरानी है,
वतन की हर मुसीबत पर उसे खुशियाँ मनानी है,



हमारी हार पर दुश्मन सदा ही मुस्कराया है,
जली जब मुम्बई,लाहौर ने उत्सव मनाया है,



ख़ुशी उस पाक की सुन लीजिये,बस ये इशारा है,
फकत मोदी नही सम्पूर्ण हिन्दुस्तान हारा है,



अगर तुम सोचते हो वो तुम्हारी जीत पर खुश है?
तुम्हे फिर से मिली कुर्सी,मधुर संगीत पर खुश हैं?



सरासर बेवकूफी सोचना ये,बात को समझो,
बिहारी बाबुओं उस पाक की औकात को समझो,



कई दिन बाद उसकी रूह में इक डर समाया था,
कहाँ से आ गया दिल्ली में मोदी,हडबडाया था,



जिहादी सोच पर छाने लगे,हिंदुत्व के बादल,
जरा से वक्त में यह देख कर हाफिज हुआ पागल,



समूचे हिन्द के सम्मान से वो तिलमलाया था,
कि जब जय हिन्द ओबामा सरीखा गुनगुनाया था,



मगर लालू नितिश में आज उसको यार दिखते हैं,
उसे मोदी पराजय के बड़े आसार दिखते हैं,



बताओ किसलिए इस पाक को भाया इलेक्शन है?
कराची का बताओ क्यों हुआ पटना कनेक्सन है,



बिहारी बाबुओ उस पाक की हिम्मत बढ़ाओ जी.
कि जाए भाड़ में भारत,मगर मोदी भगाओ जी,



दिया है आपने उस पाक को तोहफा बधाई हो,
मुझे लगता है सबने नाक मिलकर के कटाई हो,
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आज कलम से कागज पर मै दंगा करने वाला हूँ,
मीडिया की सच्चाई को मै नंगा करने वाला हूँ।

मीडिया जिसको लोकतंत्र का चौंथा खंभा होना था, 
खबरों की पावनता में जिसको, गंगा होना था,


आज वही दिखता है हमको वैश्या के किरदारों मे, 
बिकने को तैयार खड़ा है गली चौक बाजारों मे।


दाल में काला होता है तुम काली दाल दिखाते हो, 
सुरा सुंदरी उपहारों की खुब मलाई खाते हो।


गले मिले सलमान से आमिर, ये खबरों का स्तर है, 
और दिखाते इंद्राणी का कितने फिट का बिस्तर है।


म्यॉमार में सेना के साहस का खंडन करते हो, 
और हमेशा दाउद का तुम महिमा मंडन करते हो।


हिन्दु कोई मर जाए तो घर का मसला कहते हो, 
मुसलमान की मौत को मानवता पे हमला कहते हो।


लोकतंत्र की संप्रभुता पर तुमने कैसा मारा चाटा है, 
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दु और मुसलमान को बाँटा है।


साठ साल की लूट पे भारी एक सूट दिखलाते हो, 
ओवैशी को भारत का तुम रॉबिनहुड बतलाते हो।


दिल्ली मे जब पापी वहशी चीरहरण मे लगे रहे, 
तुम एश्श्वर्या की बेटी के नामकरण मे लगे रहे। '


'दिल से' ये दुनिया समझ रही है खेल ये बेहद गंदा है, 
मीडिया हाउस और नही कुछ ब्लैकमेलिंग का धंधा है।


गूंगे की आवाज बनो अंधे की लाठी हो जाओ, 
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो और फिर से जिंदा हो जाओ... !!