Thursday, 27 August 2015

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें, पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

रचनाकार-गौरव चौहान इटावा उ प्र 

आओ मिलकर आग लगाएं,नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,आरक्षण की मांग करें,

पहले से हम बंटे हुए हैं,और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,मिलकर इक दूजे को खाएं हम,

देश मरे भूखा चाहे पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत,भारत माँ के बाल नोचने आओ जी,

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में भूल नही ये जाना है,

याद करो ज़मीन के हिस्सों पर जब हम टकराते थे,
गज़नी कासिम बाबर मौका पाते ही घुस आते थे

अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर,

हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है,

मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर पंडित बनिया सब के सब कर लो तैयारी जी,

जब पटेल के कुनबों की थाली खाली हो सकती है,
कई राजपूतों के घर भी कंगाली हो सकती है,

बनिए का बेटा रिक्शे की मज़दूरी कर सकता है,
और किसी वामन का बेटा भूखा भी मर सकता है,

आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो,

शर्म करो,हिन्दू बनते हो,नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में,ये ज्वालायें फूकेंगी,

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे गजनी की संतानो से,

ऐसे ही हिन्दू समाज के कतरे कतरे कर डालो,
संविधान को छलनी कर के,गोबर इसमें भर डालो,

राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे,

हिंदी सिनेमा की महान फ़िल्म 'शोले' को रिलीज हुए 40 साल पूरे हो गये। इस अवसर पर देश की जानी-मानी हस्तियों ने इस फ़िल्म के बारे में क्या कहा, पढ़िये-

हिंदी सिनेमा की महान फ़िल्म 'शोले' को रिलीज हुए 40 साल पूरे हो गये। इस अवसर पर देश की जानी-मानी हस्तियों ने इस फ़िल्म के बारे में क्या कहा, पढ़िये-


नरेंद्र मोदीः मित्रों, कांग्रेस के भ्रष्टाचार की वजह से हम 40 सालों में केवल एक ही 'शोले' बना पाये। अगर मेरे सवा सौ करोड़ भारतवासी आज प्रण लें तो 2022 तक हम ऐसी 10 शोले बना सकते हैं। भाईयों-बहनों, मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि शोले से भी मेरा बहोत गहरा नाता है।

राहुल गांधीः एक मिनट! मेरा पर्चा कहां गया? कहां गया पर्चा? हां, मिल गया! नहीं, ये तो दूसरा है। शोले…शोले…शोले…कहां गया शोले वाला! यहीं रुको! मैं अभी आता हूं।

असदउद्दीन ओवैसीः मैं पूछता हूं मोढी से कि शोले में गब्बर बनाने को तुम लोगां कू एक मुसलमान ही मिला था क्या? तुम्हें मरवाने को कोई हिदू एक्टर नहीं मिला क्या पूरे हिन्दोस्तान में!

अरविंद केजरीवालः प्रधानमंत्री सर! जय, वीरू, ठाकुर, बसंती सब आपस में मिले हुए हैं। एक आम डाकू को मारने के लिये आपकी पुलिस बदमाशों की मदद ले रही है। यही तो करप्शन है! रामगढ़ की पुलिस को हमारे अंडर करो। फिर देखो दो दिन में कैसे ठीक कर देते हैं!

सुषमा स्वराजः जय और वीरू ने गब्बर को मारने में ठाकुर की मदद 'मानवीय आधार' पर की थी। अगर ऐसा करना गुनाह है तो जय और वीरू ने गुनाह किया था, लेकिन गब्बर को मारने के बदले में उन्होंने एक नया पैसा नहीं लिया था।

ललित मोदीः ठाकुर साब मुझसे लंदन के एक होटल में आकर मिले थे। मेरे कहने पर ही उन्होंने श्रीनिवासन गब्बर को हटाने के लिये जय और वीरू की मदद ली थी। मैंने उन्हें गब्बर के ख़िलाफ़ कई सबूत भी दिये थे।

गजेंद्र चौहानः 'रामगढ़ के शोले' तो मैंने देखी है। ये वाली 'शोले' कब बनी थी?